सिर्फ नाम नहीं, विश्व के गौरव का आधार हैं 'अटल' !

सिर्फ नाम नहीं, विश्व के गौरव का आधार हैं 'अटल'

अटल सिर्फ एक व्यक्ति या नाम नहीं हैं, वह विश्वास हैं, वह विचार हैं, खुद में अटल रहकर सत्य को आत्मसात करने वाले अटल… फिर भी जानना चाहते हैं तो पढ़िए, कौन हैं अटल…

अटल आवाज हैं, उस अंतिम व्यक्ति की जो आज भी अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा नहीं कर पा रहा है…
अटल स्वर हैं, उस युवा भारत का जिसका शौर्य विश्व पटल के सर्वोच्च शिखर पर छा रहा है…
अटल प्रमाण हैं, उस हिंदुत्व का जिसने कभी बलपूर्वक किसी को स्वयं में मिलाने की कोशिश नहीं की लेकिन स्वीकार सभी को किया…
अटल राग हैं, उस कविता का जिसकी ज्वाला से आज भी युवाओं के मन में राष्ट्रप्रेम की आग भड़क जाती है…
अटल प्रकाश हैं, उस सूर्य का जो ‘भगवा’ होते हुए भी सभी को रोशनी देता है…
अटल ज्योति हैं, उस दीपक की जो मन की कुंठा को दूर कर उसमें आत्मविश्वास का प्रकाश भरता है…
अटल उम्मीद हैं, उस भारत की जो राजनीति में गठबंधन के आगे घुटने टेकने पर मजबूर हो जाता है…

अटल प्रेरणा हैं, उन नेताओं के लिए जो सत्ता लोभ में देशहित को भी नजरंदाज करने से पीछे नहीं हटते…
अटल ईमानदारी हैं, हर उस व्यक्ति की जो भूखा रहकर भी अपदार्थ पैसे को छूने के बारे में नहीं सोचता…
अटल शांति हैं, उस विषधर की जिसकी फुंफकार से ही ज्वालामुखी फट जाया करते हैं…
अटल सम्मान हैं, उस द्रौपदी का जिसका चीरहरण बस चंद पलों में होने ही वाला है…
अटल विश्वास हैं, उसी पांचाली का जिसे पता है कि उसके मान और प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए कृष्ण कुछ तो जरूर करेंगे…
अटल क्रोध हैं, पूस की रात में सड़क के किनारे सोते हुए उस विकलांग का, जो ‘अच्छे दिन’ के इंतजार में सालों से मंदिर के बगल में यूं ही पड़ा है…

अटल शौर्य हैं, उस राम का जो वानर, रीछ और वनवासियों को साथ लेकर निकल पड़ता है दुनिया के सबसे बड़े दुश्मन से लड़ने…
अटल खौफ हैं, उस रावण के लिए जो कल फिर किसी सीता को राम से अलग करने वाला है…
अटल स्वाभिमान हैं, उस हिंदी का जो विश्व मंच पर 1977 में पहली बार गूंजी थी और आज अपने सूर्याकार में है…
अटल स्वप्न हैं, भारत के सम्मान का जो राजनीति नहीं, राष्ट्रनीति से ही मिल सकता है…
अटल आगाज हैं, 21वीं सदी के भारत का जो पुनः विश्वगुरु के पद पर प्रतिष्ठित होने वाला है…

आज जब विदेशों में भारत माता की जय और वंदे मातरम् के नारे लगते हैं, तो खुशी होती है लेकिन अटल जी एक ऐसे व्यक्तित्व हैं जो सिर्फ ‘भारत जिंदाबाद’ के नारे नहीं लगवाते थे बल्कि भारत को जीते थे। उन्होंने जब संयुक्त राष्ट्र संघ में विदेश मंत्री के नाते भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए हिंदी में भाषण दिया तो अंत में ‘जय जगत’ बोला। उन्होंने बताया कि भारत ने न सिर्फ ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ का सिद्धांत दिया है बल्कि हम उसे जीते भी हैं।

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